निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में इतने ज्यादा ब्लाइंड स्पॉट क्यों होते हैं और इन्हें कैसे संभाला जाता है

17 Dec 2025

निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में इतने ज्यादा ब्लाइंड स्पॉट क्यों होते हैं और इन्हें कैसे संभाला जाता है

निर्माण स्थलों पर भारी वाहनों के ब्लाइंड स्पॉट क्यों बनते हैं, उनसे होने वाले खतरे और प्रशिक्षण व तकनीक से सुरक्षा कैसे बढ़ती है।

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PV

By Pratham

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निर्माण स्थल ऐसे स्थान होते हैं जहां लोग और भारी मशीनें बहुत नजदीक रहकर काम करती हैं। डंप ट्रक, खुदाई करने वाली मशीनें और लोडर जैसे बड़े और भारी वाहन काम पूरा करने के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन इनके साथ सुरक्षा से जुड़े खतरे भी बढ़ जाते हैं। इनमें सबसे आम और गंभीर समस्या ब्लाइंड स्पॉट की होती है। ब्लाइंड स्पॉट यानी वाहन के आसपास के वे हिस्से जो चालक को दिखाई नहीं देते। निर्माण स्थल पर होने वाली कई दुर्घटनाओं का मुख्य कारण यही होता है।

दिखने से ज्यादा मजबूती पर ध्यान

निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहन सबसे पहले मजबूती के लिए बनाए जाते हैं। इन्हें भारी सामान उठाना होता है, उबड़-खाबड़ जमीन पर चलना होता है और दबाव में भी संतुलन बनाए रखना होता है। इसके लिए कंपनियां मोटा ढांचा, बड़े इंजन और मजबूत केबिन बनाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वाहन का आकार बड़ा हो जाता है और चालक को चारों तरफ देखने में दिक्कत होती है।

चालक आमतौर पर जमीन से काफी ऊंचाई पर बैठता है, जिससे पास में खड़े लोगों या चीजों से दूरी बन जाती है। बड़ा बोनट, चौड़े खंभे और भारी औजार सीधे देखने में रुकावट डालते हैं। जब बाल्टी या बूम जैसे औजार हिलते हैं, तो ब्लाइंड स्पॉट भी बदल जाते हैं और आसपास क्या हो रहा है, यह समझना और मुश्किल हो जाता है।

लगातार बदलता और भीड़भाड़ वाला माहौल

निर्माण स्थल आम सड़कों जैसे नहीं होते। यहां रास्ते रोज बदलते हैं, सामान इधर-उधर किया जाता है और मजदूर अक्सर चलती मशीनों के पास से गुजरते हैं। धूल, कीचड़ और कम रोशनी की वजह से देखने की क्षमता और कम हो जाती है।

शोर भी एक बड़ी समस्या है। इंजन, ड्रिल और दूसरी मशीनों की लगातार आवाज के कारण चालक और मजदूर चेतावनी की आवाजें ठीक से नहीं सुन पाते। जब देखने और सुनने दोनों में परेशानी होती है, तो गलती होने की संभावना बढ़ जाती है।

तकनीक कैसे सुरक्षा बढ़ाती है

इन खतरों को देखते हुए आजकल कई आधुनिक निर्माण वाहनों में सुरक्षा से जुड़ी तकनीक लगाई जा रही है। पीछे और किनारों पर लगाए गए कैमरे उन जगहों को दिखाने में मदद करते हैं जो शीशों से नहीं दिखते। इन कैमरों से मिलने वाली सीधी तस्वीर चालक को पीछे जाते समय और मोड़ लेते समय ज्यादा सतर्क बनाती है।

आजकल मशीनों में सेंसर भी आम हो गए हैं। जब कोई व्यक्ति या वस्तु बहुत पास आ जाती है, तो ये सेंसर चेतावनी देते हैं। कुछ सिस्टम धूल भरे माहौल में भी हलचल को पहचान लेते हैं, जिससे चालक को समय रहते गति कम करने का मौका मिल जाता है।

सबसे अहम भूमिका इंसानों की ही होती है

चाहे कितनी भी आधुनिक मशीनें क्यों न हों, सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार इंसान ही होता है। तंग जगहों में वाहन को ले जाने के लिए प्रशिक्षित संकेत देने वाले लोगों की मदद ली जाती है। साफ हाथ के इशारे और रेडियो के जरिए बातचीत चालक को आसपास की जानकारी देती रहती है।

चालकों को यह सिखाया जाता है कि ब्लाइंड स्पॉट कहां होते हैं और उनसे कैसे निपटना है। धीरे चलना, पीछे जाते समय रुककर देखना और बार-बार शीशों की जांच करना जैसे छोटे कदम बड़ी दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं।

जोखिम को समझना और संभालना जरूरी

ब्लाइंड स्पॉट निर्माण वाहनों की बनावट का स्वाभाविक हिस्सा हैं। इन्हें पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन इन्हें सही तरीके से संभाला जा सकता है। जब तकनीक, प्रशिक्षण और टीमवर्क साथ मिलकर काम करते हैं, तो निर्माण स्थल ज्यादा सुरक्षित बन जाते हैं। जागरूकता और सावधानी ही जीवन की रक्षा के सबसे मजबूत साधन हैं।

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